क्या है मॉडरेशन नीति? सीबीएसई (Central Board of Secondary Education) कभी बोर्ड परीक्षा में छात्रों के प्राप्त अंकों में कुछ अंकों का संशोधन या वृद्धि करती थी ताकि पेपर की कठिनाई से होने वाले प्रभाव को संतुलित किया जा सके। इसे मॉडरेशन पॉलिसी कहते हैं।
पूर्व में इस नीति के कारण कुछ छात्रों के अंक सेन्ट्रल फार्मूले के तहत बढ़ाए गए थे और पास-फेल रिज़ल्ट प्रभावित होते थे।
लेकिन आजकल सीबीएसई इसे लगातार अपडेट कर रही है, जिससे नतीजों में अधिक पारदर्शिता आए और हर छात्र के असली प्रदर्शन को समझा जा सके।
क्या इस बार कोई भी फेल नहीं होगा?
आधिकारिक रूप से सीबीएसई ने यह घोषणा नहीं की है कि “कोई भी फेल नहीं होगा”।
कुछ सोशल मीडिया और अफवाहों में यह ट्रेंड चल रहा है कि “मॉडरेशन के कारण हर छात्र पास होगा और अंक बढ़ेंगे”, परन्तु बोर्ड की तरफ से इस बारे में कोई आधिकारिक सरकर सर्कुलर 2026 के लिए जारी नहीं हुआ है।
👉 Reddit और दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर छात्रों ने यह माना है कि मॉडरेशन हो सकता है, लेकिन यह हर स्टूडेंट को अधिक अंक दिलाने वाला फ़ॉर्मूला नहीं है — और बोर्ड की तरफ से स्पष्ट विवरण मिलने तक यह पुष्टि नहीं हो सकती।
सीबीएसई की ताज़ा व्यवस्था: मॉडरेशन + मूल्यांकन
सीबीएसई ने 2026 से मूल्यांकन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है:
On Screen Marking System (OSM) लागू किया गया है।
अब कक्षा 12 के उत्तर पुस्तिकाएँ डिजिटल रूप से जाँच की जाएँगी। इससे
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स्कोरिंग में Human Error कम होगा
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गणना में गलतियाँ कम होंगी
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पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता कम हो सकती है 📉
स्टूडेंट्स अब प्रैक्टिकल मार्क्स सुधार नहीं कर सकते (Practical Marks में Improvement नहीं)।
इन बदलावों का उद्देश्य अंकपत्रों में अधिक निष्पक्षता और सटीकता लाना है — न कि सिर्फ़ मॉडरेशन के ज़रिये पास-फेल को बदलना।
क्या मार्क्स बढ़ेंगे? यह कैसे काम करता था?
- पहले मॉडरेशन में पेपर की कठिनाई और विभिन्न सेट्स के असंतुलन को ध्यान में रखा जाता था।
- बोर्ड के विशेषज्ञ एक फ़ॉर्मूला से बैंडिंग करते थे, जिससे कठिन पेपर देने वाले छात्रों को कुछ अतिरिक्त अंक मिलते थे।
- यह नहीं था कि हर कोई फेल से पास हो गया — बल्कि पेपर के स्तर के हिसाब से कुछ जोड़/घटाव किया जाता था।
👉 मॉडरेशन केवल तभी उपयोग में आता है जब अलग-अलग सेट्स के स्तर में बड़ा फ़र्क़ हो।
CBSE पास प्रतिशत और परिणाम का ट्रेंड
📌 उदाहरण के लिए, 2025 के बोर्ड परिणाम में 12वीं का पास प्रतिशत 88.39% रहा था — यह एक उच्च औसत है लेकिन यह मॉडरेशन का सीधा परिणाम नहीं है।
- दूसरे शब्दों में:
- अंकपत्रों में वृद्धि अपनी जगह है,
- लेकिन बोर्ड यह नहीं कहता कि “सब लोग पास होंगे”।
छात्रों के लिए सलाह (CBSE 2026)
- अपना काम भरोसेमंद अधिकारी स्रोत से देखें — जैसे सीबीएसई के आधिकारिक वेबसाइट/नोटिस।
- रिज़ल्ट आने से पहले अफ़वाहों पर विश्वास न करें।
- नए मूल्यांकन सिस्टम (OSM) के चलते गलत गणना से होने वाली परेशानियाँ कम होंगी।
- अगर आप किसी विषय में संतुष्ट नहीं हैं, तो पुनर्मूल्यांकन के लिए योग्य मार्गों पर ध्यान दें।
निष्कर्ष
- सीबीएसई की मॉडरेशन नीति कभी-कभी कुछ छात्रों के अंकों में सुधार कर सकती है, लेकिन
- यह नहीं गारंटी देती कि हर कोई फेल से पास हो जाएगा।
- 2026 में OSM जैसे तकनीकी बदलाव से मूल्यांकन और अधिक निष्पक्ष होने की दिशा में बढ़ा है।
- Fake News या अफवाहों से बचें, और बोर्ड के ऑफिशियल नोटिफिकेशन को ही भरोसा दें।